सहारा हॉस्पिटल को किराए पर दे दिया गया। हमें कोरोना मामलों से कोई लेना-देना नहीं है ... लतीफ अनवर
मालेगांव (संवाददाता) में, कोरोना के मरीजों की सबसे ज्यादा मौत सहारा अस्पताल में होती है। जन आक्रोश के कारण डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए और कई नेताओं ने अस्पताल की आलोचना की। निगम का कहना है कि ज्यादातर गंभीर मरीज सहारा अस्पताल आते हैं। सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि सहारा अस्पताल चिकित्सा संसाधनों की कमी के कारण मौतों के लिए कुख्यात हो रहा है।
इसको लेकर लोगों में संदेह फैल रहा है। इस संबंध में, अब्दुल लतीफ अनवर और अस्पताल के कर्मचारियों ने संवाददाता को बताया कि सहारा अस्पताल पिछले 11 मई से कोड के लिए निगम को पट्टे पर दिया गया है। कोरोना मामलों से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। निगम और स्वास्थ्य विभाग सभी कोरोना मामलों की देखभाल करते हैं। अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों को इन मामलों से कोई लेना देना नहीं है। अब्दुल लतीफ अनवर ने शोक व्यक्त किया कि कोरोना महामारी में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए, हमने सहारा अस्पताल को लोक कल्याण के लिए निगम को किराए पर दे दिया था। किराए के अलावा, यह अस्पताल में अव्यवस्था ला रहा है। लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि अगर स्थिति वैसी ही बनी रही तो हम अस्पताल को निगम से वापस ले सकते हैं।
जब से अस्पताल किराए पर लिया गया था, हमारा पूरा स्टाफ रोगियों और निगम प्रबंधन को मानवीय परिस्थितियों में बड़ी ईमानदारी के साथ दिन-रात मुफ्त सहायता प्रदान करता रहा है।
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